Karyapaddhati

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Through Karyapaddhati the awareness of the need of organized work for the regeneration of nation is generated. This energy is channelized to undertake a number of activities to actualize Swami Vivekananda’s vision of Jagadguru Bharat.

Karyapaddhati

The vision of Swami Vivekananda was to rebuild Mother Bharat in tune with her personality enshrined in yoga and spiritual lore. The genius of Eknathji Ranade located the holistic concept of yoga, another name for spirituality in the words of Swami Vivekananda 'Each Soul is potentially Divine,' and adopted it as the basis of Vivekananda Kendra(VK). He could see the vision of Sri Aurobindo enunciating Integral yoga as a furthering depth of Swamiji's thoughts on yoga. Eknathji trained in the organizational skills and powered by a patriotic favor with the holistic vision of Hindu nation enunciated a century ago by Swami Vivekananda, in tune with the emerging trends of popularity of yoga gave a direction to the Kendra in his first pamphlet 'Yoga, the core of Vivekananda Kendra'.
Philosophy
  • To integrate the individual with society.
  • To channelise the energy of organised collective life for productive Nation building work.
Vision:
  • If a whose people in same corner of the globe successfully evolve a satisfactory social order that can provide abundant opportunities to each of the constituents to meet the basic needs of the body-mind complex and allow him to fulfill the inner aspiration, it would be the supreme act of service. : -Ma. Eknathji Ranade
“Let not a single day pass without your learning a verse, half a verse, or a fourth of it, or even one letter of it; nor without attending to charity, study and other pious activity.”

- Chanakya

Philosophy
  • Transforming our people's inherent God-wardness into the right spiritual urge rising out of the teachings of the Upanishads, namely.
  • "Each soul is potentially divine"
  • "Faith in God, in turn means faith in one's self i.e. in one's potentiality to rise to divine heights.
  • To convert the spiritual fervour thus released into work of National reconstruction.
Objectives
  • Comming,thinking and working together for National Resurgence.
  • Clarity of thoughts in National perspective.
  • To know about our achievements and potentialities as a nation.
  • Direction for National Resurgence.
When will our thirst for freedom be quenched? Only when our obsession for slavery is killed.
- Subrahmanya Bharati
Nurturing Karyakarta - Developing understanding - working together for national resurgence.
Children are not vessels to be filled; They are lamps to be lit!
- Swami Chinmayananda
All round development of child through Kahani (stories), Khel (games), Gita and Geet (songs) in weekely classes.
Objectives
  • To instill love for country
  • To create urge to strive for excellence in all acts
  • To bring out latent talent
  • For five-fold personality development


Recent Karyapaddhati




Ajmer

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कोविड -19 के संक्रमण से बचाव है जलनेति - डॉ स्वतंत्र शर्मा

08-Jul-2020

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आज कोविड-19 के संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं तथा अनेक चिकित्सा पद्धतियों के द्वारा इससे बचने के प्रयास भी चल रहे हैं| योग और आयुर्वेद में षट्कर्म में जलनेति एक ऐसी क्रिया है जिसके नियमित अभ्यास से हमारी श्वसन नली और उससे जुड़े विभिन्न साइनस क्षेत्र स्वच्छ हो जाते हैं और संक्रमण होने की संभावना नगण्य हो जाती है| प्राकृतिक चिकित्सा में जलनेति को ईएनटी केयर बताया गया है जिसके द्वारा हम कान नाक और गला तीनों को स्वच्छ रख सकते हैं और इसके द्वारा विभिन्न प्रकार की एलर्जी और संक्रमण से बचा जा सकता है | जलनेति हमारी आंखों को भी स्वस्थ रखती है और लंबे समय तक जल नेति के अभ्यास द्वारा नेत्रों की ज्योति भी बढ़ाई जा सकती है | उक्त विचार विवेकानंद केंद्र के प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ स्वतंत्र कुमार शर्मा ने विवेकानंद विस्तार में श्रीजी वाटिका में संचालित नियमित योग वर्ग में जल नेति एवं वमन धौति के प्रशिक्षण के दौरान व्यक्त किए| वमन धौति एवं कुंजल क्रिया कराते हुए डॉ शर्मा ने बताया की वमन धौति के द्वारा हम अपने छोटी आंत और पाचन तंत्र के समस्त रोग जैसे अपच, गैस एवं हाइपरएसिडिटी को प्राकृतिक रूप से ही दूर कर लेते हैं | इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के विभाग संपर्क प्रमुख श्री रविंद्र जैन, नगर प्रमुख श्री अखिल शर्मा, योग वर्ग प्रमुख श्री नाथूलाल जैन, संजीव जैन, श्री धर्मेंद्र जैन, श्री प्रवीण जैन, कैलेन्द्र जैन, अनिल जैन, उमेश जैन, नरेश जैन एवं अन्य जैन समाज के बंधु उपस्थित थे|

कोविड  

Ajmer

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भजन गंज योग वर्ग में गुरु पूर्णिमा उत्सव का आयोजन

05-Jul-2020

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विवेकानंद विस्तार के भजन गंज स्थित राधिका विला गार्डन में संचालित योग वर्ग में आज गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। गुरु तत्व का चिंतन और उस पर चर्चा करते हुए केंद्र के प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ स्वतंत्र शर्मा ने बताया की विवेकानंद केंद्र में ओंकार को गुरु स्वीकार किया गया है महामुनि पतंजलि द्वारा ईश्वर के जिस स्वरूप का वर्णन प्रणव के रूप में किया गया है वह ईश्वर क्लेश, कर्म, विपाक और आशय से परे और पुरुष विशेष है जो सर्व कालों में विद्यमान है एवं उससे ऊपर और कोई नहीं है। चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि जो ज्ञान दे वह गुरु नहीं है अपितु जो चित्त पर पड़े अज्ञान के आवरण को हटाते हुए ज्ञान की ज्योति को प्रकाशित करें वह सच्चे अर्थों में गुरु कहा जा सकता है। इस अवसर पर योग वर्ग शिक्षक के रूप में वर्ग साधकों द्वारा डॉ शर्मा को साहित्य के रूप में पुस्तक भेंट की गई। इस अवसर पर अजमेर दक्षिण की विधायक श्रीमती अनिता भदेल सहित श्रीमती रजनी यादव, शुभ्रा यादव, श्री यश, कार्यालय प्रमुख श्री गणपत सिंह जी, विकास सिंह, सुश्री मानसी एवं श्रीमती गुंजन कुलश्रेष्ठ सहित अन्य योग साधक उपस्थित थे।

भजन  

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सेवा से ही मानव कल्याण संभव -उमेश कुमार चौरसिया

04-Jul-2020

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स्वामी विवेकानंद का जीवन और संदेश हमें वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह संदेश देता है कि नर सेवा और नारायण सेवा का भाव और दरिद्रो देवो भव का भाव जितना हमारे भीतर गहरा उतरेगा उतना ही अपने जीवन को सार्थक कर सकेंगे। जीवन में शौच, संतोष, तप एवं स्वाध्याय का आचरण करने से हम स्वामी विवेकानंद के चारित्रिक गुणों को अपने भीतर प्रतिष्ठापित कर सकते हैं और अपने जीवन में आनंद का अनुभव कर सकते हैं। उक्त विचार प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं साहित्यकार तथा विवेकानन्द हिंदी प्रकाशन विभाग जोधपुर की प्रकाशन समिति सदस्य एवं राजस्थान हिन्दी साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य श्री उमेश कुमार चौरसिया ने स्वामी विवेकानंद महानिर्वाण दिवस के अवसर पर चर्चा करते हुए। स्वामी विवेकानंद के जीवन के अनेक प्रसंगों को उल्लेखित करते हुए श्री चौरसिया ने बताया कि आज कोविड-19 के काल में हमें मानव धर्म का आचरण करना है। स्वामी विवेकानन्द शिकागो में कई बार महलनुमा घरों में भी ठहरते थे किंतु वहाँ पर भी वे भारत के दरिद्रों के प्रति अपने करूणाभाव के कारण रात-रात भर सो नहीं पाते थे। अनेकों बार स्वामी विवेकानन्द ने भारत के विश्वगुरू होने के स्वप्न को साकार करने में आज की आधुनिक युवा पीढ़ी की आवश्यकता को अनुभव किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा विधायक अजमेर दक्षिण श्रीमती अनिता भदेल ने अपने वक्तव्य में बताया कि धर्म भारत की आत्मा है तथा धर्मनिरपेक्ष समाज कभी भी उन्नत राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकता। चाहे सामाजिक जीवन हो अथवा राजनीतिक जीवन सभी में धर्म की प्रतिष्ठा अत्यंत आवश्यक है। बिना धर्म की समझ रखें अंग्रेजों द्वारा भारत के संबंध में लिखा गया इतिहास भारत के गौरव को धूमिल करता है किंतु आज संपूर्ण विश्व को भारत की शक्ति का अहसास होने लगा है और आज दुनिया भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रही है। इस अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा के विवेकानन्द विस्तार के कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए आवश्यक नियम अर्थात् सामाजिक दूरी का पालन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान प्रान्त से प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ0 स्वतन्त्र शर्मा, विभाग संपर्क प्रमुख श्री रविन्द्र जैन, विभाग सह संचालिका श्रीमती कुसुम गौतम सहित नगर सह प्रमुख बीना रानी, युवा प्रमुख श्री अंकुर प्रजापति, कार्यालय प्रमुख श्री गणपत सिंह, योग वर्ग प्रमुख श्री नाथूलाल जैन, संजीव जैन सहित समस्त योग वर्गों के प्रमुख एवं योग साधक उपस्थित थे। कार्यक्रम में कुल उपस्थिति 35 रही।

सेवा  सेवा

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डॉ आम्बेडकर एक मनस्वी मनुष्य - प्रांजलि येरीकर

14-Apr-2020 | 256 Present

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डाॅ. भीमराव आम्बेडकर का जीवन संघर्ष की कहानी है किन्तु यह संघर्ष मात्र स्वयं के लिए नही था यह संघर्ष पूरे बहिष्कृत समाज की भलाई के लिए था। डा. अम्बेडकर ऐसे चैतन्य दीप हैं जो समाज में अन्तर्बाह्य प्रकाश करते हैं। एक महार बालक भीम से डा.अम्बेडकर और बाबा साहेब होने की कण्टकाकीर्ण यात्रा कंकर के शंकर होने की यात्रा है जो अति रोमाञ्चकारी एवं प्रेरणादायक है। उक्त विचार विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की राजस्थान प्रान्त संगठक सुश्री प्रांजलि येरीकर ने केन्द्र द्वारा आयोजित ई स्वाध्याय के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि मनुष्य जब समाज के लिए कुछ करता है तो वह कहां से कहाँ पहुंचता है उसका उदाहरण डाॅ. अंबेडकर हैं। उनका संग्राम किसी वर्ग से नही था अपितु यह मानव को मानववत व्यवहार मिले इसलिए था। जब उन्हें संविधान बनाने का दायित्व मिला तो उन्होंने पूरे देश के हर एक मनुष्य का हित ध्यान में रखा न कि किसी जातिविशेष का। वे सवर्णों से द्वेष भाव नही रखते थे, उनके अनेक साथी सवर्ण समाज से आते थे। बाबासाहब कहते थे उन्हें ब्राह्मण वृत्तिका विरोध करना है ब्राह्मणों का नहीं। अत्यंत दुःखी होनेके बाद भी जब मतान्तर करने की बारी आई तब पूरे 21 वर्ष चिंतन करने के बाद उन्होंने देश का हित सामने रखते हुए, बौद्ध मत का स्वीकार किया। यह निदर्शक है कि देश सबसे ऊपर है। अन्याय, अत्याचार, पीढ़ियों से चलती आई दुष्परम्परा सबकुछ देश हित के आगे गौण है। उनके विचारों का जो विकृतिकरण आज अनुभव हो रहा है उसे उत्तर देना है तो बाबासाहब का अध्ययन करना होगा। मूल से उनके विचारों को समझना होगा, स्वयं समझे औरों को समझाना होगा। उनकी प्रेरणा हमें निरन्तर इस राष्ट्र सेवा के पथ पर आगे बढ़ने में सहायता करें इसलिए इस वर्ष उनकी जीवनी पढ़ने का संकल्प ले सकते है। उक्त ई स्वाध्याय में डाॅ. अनिता खुराना, कत्थकली, श्वेता टाकलकर, उमेश कुमार चौरसिया, प्रताप, डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा, दीपक खैरे, नंदन कुलकर्णी, राजेन्द्र खंगारोत, कैलाश नाथ शर्मा आदि ने आनलाईन भाग लिया।


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हनुमान का चरित्र हमारा राष्ट्रीय आदर्श - डी.भानुदास

08-Apr-2020 | 256 Present

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हनुमान भगवान राम की आज्ञा पर समुद्र को लांघ गए। वे सेवा और साहस के प्रतीक हैं। स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि राम के हित के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने में जिन्हें तनिक भी संकोच नहीं होता, जिनके जीवन का एक ही व्रत है कि राम के प्रत्येक इच्छा को क्रियान्वित करना, स्वयं राम भी जिनकी प्रत्येक सलाह का सम्मान करते हैं, ऐसे हनुमान प्रत्येक व्यक्ति को लक्ष्य के प्रति सजग रहकर अपने राष्ट्र और समाज की सेवा करने की प्रेरणा देते हैं उक्त विचार विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय महासचिव डी.भानुदास ने हनुमान जयंती के अवसर पर आयोजित ई स्वाध्याय के दौरान व्यक्त किए। व्हाॅट्सएैप पर ई स्वाध्याय के दौरान राम परिवार में सर्वाधिक मंदिर बजरंग बली के पाए जाते हैं इनके कारणों पर चर्चा करते हुए हनुमान को बुद्धि, शक्ति, साहस, निडरता, वाकपटुता, समय.प्रबंधन, कुशलता, निपुणता इत्यादि गुणों के कारण उनकी समाज में आवश्यकता प्रतिष्ठापित की गई। हनुमान जी के जीवन के विभिन्न प्रसंगों विशेष रुप से लंका दहन एवं सीता अन्वेषण के दौरान घटी विभिन्न घटनाओं पर चर्चा की गई जिसमें यह सिद्ध हुआ कि सज्जनों के संकटमोचक , अहंकार का नाश करने वाले , साहसी , पुरूषार्थी , विनयशील , संगठन का सम्मान करने वाले ,कुशल वक्ता , रूद्र के अवतार , चिरंजीवी , ज्ञान और गुण के सागर ,जितेन्द्रिय ,पूर्ण निष्ठा , पूर्ण समर्पित , राम रसायन, ब्रह्मचारी हनुमान् के नाम का दीया हमें अपने भीतर जलाना होगा ! हनुमान् हैं तो उनके साथ राम भी हैं , सीता भी हैं , लक्ष्मण भी हैं ! जहां ये चारों हैं वहीं हमारा सुंदर समाज , समाज का स्वर्ग होगा ! इस संपूर्ण चर्चा से प्रत्येक कार्यकर्ता अपना लक्ष्य अनुसंधान करते हुए कार्य की पूर्णता को सिद्ध कर सकता है। उक्त चर्चा में संपूर्ण भारत से कार्यकर्ता ऑनलाइन जुड़े जिनमें हितेश स्वामी, कत्थकली, लोकेश, यश मराठे, नंदन कुलकर्णी, गौतम, त्रिपुर प्रताप, सुधीर अम्बासा, गिरीश, श्रेया, प्रवीण आदि थे तथा राजस्थान से उमेश कुमार चौरसिया, यादवराज कुमावत, कैलाश नाथ शर्मा, प्रांजलि येरीकर, वेद प्रकाश कुमावत, राजेंद्र सिंह खंगारोत, दीपक खैरे, कार्तिक ओझा प्रमुख थे।


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भगवान श्री राम भारतीय संस्कृति के प्राण तत्व हैं - डी. भानुदास

24-Mar-2020 to 04-May-2020 | 256 Present

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भगवान श्री राम भारतीय संस्कृति के प्राण तत्व हैं.. उनकी मर्यादा उनका पुरुषार्थ हमें प्रेरणा देते है। श्रीराम ने व्यक्तिगत चरित्र की अपेक्षा राष्ट्रीय चरित्र को ही महत्व दिया क्योंकि ले राजा थे और राजा का कर्तव्य प्रजा रंजन होता है इसलिए कर्तव्य महत्वपूर्ण है। जैसे मा. एकनाथ जी कहते थे कि स्वामी विवेकानंद को ईश्वर की उपाधि या परिकल्पना हमें नहीं देनी चाहिए, स्वामीजी जैसा हम सब बन सकते हैं, उसी प्रकार राम को केवल भगवान मानकर पूजा के आले में बिठाकर , रामायण को लाल कपडे में बांधकर केवल पूजा करने से कुछ नहीं होगा हमें राम को भी अपने जीवन में चरितार्थ करना होगा। भारत का बच्चा बच्चा राम है, मैं राम हूं और मैं राम बन ना चाहता हूं ऐसा सोचने से और कार्य में लग जाने से होगा। उक्त विचार विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय महासचिव डी भानुदास ने विवेकानन्द केन्द्र द्वारा अपने कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने तथा सद्विचारों के संप्रेषण के लिए निर्मित ई स्वाध्याय के अंतर्गत रामनवमी पर सांयकाल एक घण्टे का व्हाट्सएैप पर ई स्वाध्याय के अवसर पर व्यक्त किए। ई स्वाध्याय में श्रीराम के गुणों का चिंतन किया गया। चर्चा में आए बिन्दुओं में श्री राम जी भारत के आदर्श है। हमें आदर्श भारत बनाना भी है उसके साथ वह जगतगुरु हो यह भी हम चाहते है। इस अवसर पर रामायण पर आधारित एक छोटा सा खेल खेला गया जिसमें रामायण का मैं कौन सा पात्र बनना पसंद करूंगा, यह भी झांकने का प्रयास किया और फिर राम के गुणों के बारे में देखने का प्रयास किया गया। श्री राम दया के सागर है वह समाज के अति निम्न स्तर पर जीवन यापन करने वालों को भी अपना बना लेते हैं और उनके प्रति सम्मान और प्रेम का व्यवहार करते हैं। विनम्रता- छोटे बड़े सबसे प्रेम पूर्वक व्यवहार। राम की आज्ञा हेतु सबकुछ झोंक कर, अनासक्ति से प्रत्येक कार्य को करना। इस धरती पर मनुष्य का आचरण क्या होना चाहिए यह राम के चरित्र से सीखा जा सकता है। वनवास में न तो सेना थी न अन्य कोई सहयोगी। किन्तु संगठन कौशल्य से ही लक्ष्य पूर्ति हेतु वानर, भालू इत्यादि सेना बना ली। श्रेष्ठ जीवन जीने का मार्ग व टीम निर्माण का महामंत्र हो सकता है। इससे सामाजिक जीवन को एक प्रेरणा मिलती है समाज में अगर श्री राम के जीवन से अगर कुछ गुण आए तो वह समाज उत्कृष्ट समाज बन सकता है इसी तरह उत्कृष्ट राष्ट्र की भी कल्पना की जा सकती है। शबरी और हनुमान दोनो वन में है, राम उन्हें वहा स्वयं दर्शन देते है। हम भी कार्यकर्ताओ के दर्शन करने उनके घर जाया करे। छोटे के साथ छोटा बन जाना। एक बालक, पुत्र,पति,मित्र, राजा,भाई ऐसे प्रत्येक भूमिका में उच्व आदर्शों के प्रतीक है श्री राम। भगवान राम ने नर अवतार लेकर व्यक्तिगत पारिवारिक सामाजिक राष्ट्रीय सांस्कृतिक, जीवन के सभी आयामों में एक ऐसा उच्च आदर्श स्थापित किया है कि रामायण पर देश विदेशों में हजारों लोगों ने शोध किया है और आज भी यह खोज जारी है और राम का आदर्श जीवन में प्रस्थापित होने से जीवन में पूर्णता आती है। कार्य का उद्देश बड़ी इकाई का सुख ध्यान मे रखने से वो राम कार्य होकर रहेगा ।भोग हमारी सभ्यता का अंग नहीं रहा है, नैतिकता, त्याग , तप इत्यादि महत्व पूर्ण अंग रहे हैं। भोगों से ज्यादा समाज के अंतिम व्यक्ति के सुख में राजा का सुख होता है। हमारी जन्मभूमि स्वर्ग से भी सुंदर वह इसके लिए उसे गंदा नहीं करें स्वच्छता का पालन करें वहां के लोग संस्कारित हो और पंच महायज्ञ का पालन करते हुए अपनी जन्म भूमि की सेवा कर सकें। हम सब जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी इसको ध्यान में रखते हुए इस भारत मां का कार्य ही महत्वपूर्ण है इस दृष्टि से राम जी के गुणों का ध्यान करेंगे। चर्चा में अजमेर से उमेश कुमार चौरसिया , डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा, प्रांजलि येरीकर, डाॅ0 अनिता खुराना, अखिल शर्मा, विश्वा शर्मा तथा अखिल भारतीय स्तर पर दीपक खैरे, कत्थकली, लोकेश, अविनाश पारीक, अशोक खण्डेलवाल, के एन शर्मा आदि ने प्रमुखता से अपने विचार रखे। प्रचार प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि विवेकानन्द केन्द्र द्वारा प्रतिदिन फेकबुक के माध्यम से प्रातः 6 बजे अपनी नित्य ई योग कक्षा का संचालन भी निरंतर कर रहा है जिसमें संपूर्ण भारत के लोग प्रतिदिन जुड़ते हैं।


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विवेक योग संगम

15-Dec-2019

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अजमेर नगर में योग चेतना जागरण की दृष्टि से अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की स्थानीय शाखा द्वारा रविवार को प्रातः 6:00 बजे से केंद्र के सभी योग वर्गों का संगम दो स्थानों पर आयोजित किया गया जिसमें नियमित योगाभ्यास के साथ-साथ क्रीडा योग के तहत विभिन्न खेल खेले गए। योग भ्रमण द्वारा पर्यावरण चेतना कार्यक्रम भी हुआ। नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने बताया की रामकृष्ण विस्तार में नगर संचालक डॉ श्याम भूतड़ा के नेतृत्व में चाणक्य स्मारक पंचशील पर विभिन्न योग साधकों ने सूर्य नमस्कार, आसन तथा प्राणायाम का अभ्यास किया। प्रकार विवेकानंद विस्तार में दूसरा कार्यक्रम अलवर गेट स्थित सेवा मंदिर परिसर में आयोजित हुआ। योग संगम में राजकीय महाविद्यालय अजमेर की डॉ.अनीता खुराना, विस्तार संचालक दिनेश नवाल, सुभाष नवाल, युवा प्रमुख अंकुर प्रजापति, सी ए लव तामरा सहित समस्त योग साधकों ने सहभागिता की।

विवेक  

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विवेक योग संगम

08-Dec-2019

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कौन चले भाई कौन चले, स्वामी जी के वीर चले जैसे जय घोषों के साथ आज रविवार को अजमेर , सुभाष उद्यान के योगा पार्क में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की स्थानीय शाखा द्वारा योग संगम कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम में क्रीड़ा योग मै पिंग पोंग, रुमाल झपट्टा, नेता की पहचान ,भस्मासुर ,केंद्र चलो तथा योग दर्शन जैसे खेल शुभ शर्मा , कुलदीप, सिद्धार्थ, सावर ,प्रदीप और शेफाली दीदी ने खिलाए । प्रारंभिक शिथलीकरण अभ्यास डॉ0 भरत गहलोत ने लिया। सूर्य नमस्कार का अभ्यास सभी साधकों को डॉ. अनीता खुराना ने करवाया। त्रिकोण आसान, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन का अभ्यास करवाया गया । प्रचार प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि योग संगम में विवेकानंद केंद्र के प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ0 स्वतंत्र शर्मा, सह प्रांत प्रमुख अविनाश शर्मा, विभाग सह संचालक कुसुम गौतम, नगर प्रमुख अखिल शर्मा, रामकृष्ण विस्तार संचालक दिनेश नवाल, डॉ अशोक मित्तल, सहित विभिन्न दायित्ववान कार्यकर्ता और अजमेर में चल रहे 7 योग वर्गों के लगभग 50 साधकों ने सहभागिता की।

विवेक  विवेक

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विवेक योग संगम

10-Nov-2019

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"व्यक्तिगत चेतना जब समष्टि रूप हो जाती है तब वह परमेष्टि के रूप में संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करने को प्रवृत्त होती है और यह रूपांतरण केवल योग के द्वारा ही संभव है। सुदूर दक्षिण में वह शिला जिस पर विवेकानंद स्मारक बना हुआ है वह अपनी आध्यात्मिक चेतना को प्रत्येक भारतवासी के हृदय में जाग्रत कर रही है और यही भाव विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी अपनी अजमेर शाखा द्वारा नियमित योग वर्गों के माध्यम से जाग्रत कर रहा है। विवेकानंद केंद्र के संस्थापक एकनाथजी रानडे द्वारा स्थापित यह प्रकल्प आज देश के लाखों युवक-युवतियों के माध्यम से अपनी विशिष्ट कार्य पद्धति जिसमें शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण, योग, स्वाध्याय एवं संस्कार द्वारा मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान का कार्य नित्य निरंतर कर रहा है। सुभाष उद्यान में मासिक योग संगम के आयोजन के अवसर पर उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर संघचालक सुनील दत्त जैन ने व्यक्त किए। इस अवसर पर कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि अजमेर दक्षिण की विधायक श्रीमती अनिता भदेल भी उपस्थित थीं। योग संगम का संचालन रामकृष्ण विस्तार के शिवाजी पार्क योग वर्ग द्वारा किया गया जिसमें विस्तार संचालक दिनेश नवाल, योग शिक्षक राधा राठी, शशांक बजाज, तृप्ति चंद्रावत सहित सभी कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। "

विवेक  विवेक

Ajmer

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विवेक योग संगम

20-Oct-2019

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अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के रामकृष्ण विस्तार का योग संगम शहीद भगत सिंह उद्यान वैशाली नगर में आयोजित किया गया।  इस योग संगम में उद्यान के योग वर्ग सहित चाणक्य स्मारक पंचशील नगर, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर एलआईसी कॉलोनी तथा शिवाजी पार्क कृष्णगंज के योग वर्ग के साधकों ने भी भाग लिया।शिथिलीकरण अभ्यास, सूर्य नमस्कार, आसन एवं प्राणायाम के अभ्यास सहित क्रीड़ा योग के तहत विभिन्न खेल खेले गए। योग चर्चा करते हुए विवेकानंद हिंदी प्रकाशन विभाग समिति सदस्य उमेश कुमार चौरसिया ने बताया की योग संगम के द्वारा विवेकानंद केंद्र अपने विभिन्म विस्तारों में योग का प्रसार कर रहा है। योग के द्वारा शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा भावनात्मक विकास की ओर जब व्यक्ति बढ़ने लगता है तब उसे अध्यात्म की सिद्धि प्राप्त होती है और संपूर्ण विश्व में आज यह सिद्ध हो चुका है कि विकास का आधार यदि अध्यात्म नहीं होता है तो वह विकास विनाश का कारण बन जाता है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर शांति की स्थापना करने के लिए योग का अनुसरण पूरी दुनिया करने को प्रवृत्त हो रही है। ऐसे में भारतीय होने के नाते हम सबको योग से जुड़कर समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान करना चाहिए। आज के इस योगसंगम में विस्तार संचालक दिनेश नवाल, विस्तार प्रमुख कुशल उपाध्याय, योग वर्ग प्रमुख डॉ भरत सिंह गहलोत सहित केंद्र के युवा प्रमुख अंकुर प्रजापति तथा जीवनव्रती कार्यकर्ता मनीषा दीदी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

विवेक  

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विवेक योग संगम

13-Oct-2019 | 70 Present

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"विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा द्वारा विवेकानंद विस्तार में अजमेर दक्षिण विधायक के कार्यालय पर 10 दिवसीय योग सत्र का प्रारंभ किया गया जिस का समापन 13 अक्टूबर को योग संगम के तहत किया गया समापन कार्यक्रम में विधायक अनिता भदेल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन अपने मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान के ध्येय के साथ योग के द्वारा प्राचीन पुरातन संस्कृति को आधुनिक नूतन संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है वह समाज के लिए अत्यंत आवश्यक एवं उपयोगी है। जन जन को योग से जोड़ने पर कार्य करने की आवश्यकता है तथा स्वामी विवेकानन्द के विचारों को जब तक गांव ढाणियों तक नहीं पहुंचा दिया जाता तब तक हमें चैन से नहीं बैठना चाहिए। विवेकानन्द केन्द्र द्वारा जनहित में किया जा रहा कार्य अनुपम है तथा इसे नित्य निरंतर बढ़ते ही रहना है। नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने बताया कि सुभाष उद्यान की सुबह योग के उद्घोष से रोमांचित हो उठी जब अजमेर नगर में संचालित आठों योग वर्गों के योग साधक योग भ्रमण पर प्रातः छः बजे सुभाष उद्यान में प्रभात फेरी पर निकले। उसके बाद योगाभ्यास में शिथलीकरण, सूर्यनमस्कार, आसन तथा क्रीड़ा योग के तहत डमरू दौड़ तथा गुरू चेला खेल खेले। "

विवेक  विवेक

Ajmer

:

विवेक योग संगम

08-Sep-2019

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विवेकानंद केंद्र के अजमेर में संचालित विभिन्न योग वर्गों का एकत्रीकरण किया गया जिसमें अखिल भारतीय संपर्क कार्यक्रम के विषय में सभी वर्गों को जानकारी दी गई तथा संपर्क सामग्री का वितरण करते हुए बताया गया आज से हमारा प्रांत स्तर पर संपर्क अभियान प्रारंभ होने जा रहा है और उसमें सभी कार्यकर्ताओं को टोलियां बनाकर कार्य करना है इस एकत्रीकरण में प्रान्त संघटक सुश्री प्रांजलि येरीकर, प्रान्त संपर्क प्रमुख श्री अशोक खंडेलवाल तथा प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. स्वतंत्र शर्मा सहित विभाग एवं नगर के सभी दायित्ववान कार्यकर्ता उपस्थित थे


Ajmer

:

विवेक योग संगम

11-Aug-2019

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कौन चले भाई कौन चले, स्वामी जी के वीर चले जैसे जय घोषों के साथ आज रविवार को अजमेर , सुभाष उद्यान के योगा पार्क में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की स्थानीय शाखा द्वारा योग संगम कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम में क्रीड़ा योग  मै पिंग पोंग, रुमाल झपट्टा, नेता की पहचान ,भस्मासुर ,केंद्र चलो  तथा योग दर्शन जैसे खेल शुभ शर्मा , कुलदीप, सिद्धार्थ, सावर ,प्रदीप और शेफाली दीदी ने खिलाए । प्रारंभिक शिथलीकरण अभ्यास डॉ0 भरत गहलोत ने लिया। सूर्य नमस्कार का अभ्यास सभी साधकों को डॉ. अनीता खुराना ने करवाया। विवेकानंद कन्याकुमारी की जीवन वृत्ति कार्यकर्ता मनीषा दीदी ने त्रिकोण आसान, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन का अभ्यास करवाया। प्रचार प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि योग संगम में विवेकानंद केंद्र के प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ0 स्वतंत्र शर्मा, सह प्रांत प्रमुख अविनाश शर्मा, विभाग सह संचालक  कुसुम गौतम, नगर प्रमुख अखिल शर्मा, रामकृष्ण विस्तार संचालक दिनेश नवाल, डॉ अशोक मित्तल, सहित विभिन्न दायित्ववान  कार्यकर्ता और अजमेर में चल रहे 7 योग वर्गों के लगभग 50 साधकों ने सहभागिता की।

विवेक  विवेक

Ajmer

:

विवेक योग संगम

13-Jul-2019 | 78 Present

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"*भरतपुर योग साधक त्रासदी पर अर्पित की श्रद्धांजलि* कौन चले भाई कौन चले, स्वामी जी के वीर चले जैसे जय घोषों के साथ शनिवार को अजमेर के सुभाष उद्यान के योगा पार्क में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की स्थानीय शाखा द्वारा योग संगम कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम में क्रीड़ा योग के तहत राम राजा रावण, आग लग रही है, योगिक वॉलीबॉल तथा योग दर्शन जैसे खेल खिलाए गए। यौगिक भ्रमण के साथ ही अर्धकटिचक्रासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन, वक्रासन तथा सूर्य नमस्कार का भी अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम के अंत में भरतपुर जिले के कुम्हेर गांव में हुई योग साधकों के आकस्मिक निधन पर 1 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। प्रचार प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि योग संगम में विवेकानंद केंद्र के प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ0 स्वतंत्र शर्मा, विभाग संचालक सत्यदेव शर्मा , विभाग सह संचालक कुसुम गौतम, नगर संचालक डॉ श्याम भूतड़ा, नगर प्रमुख अखिल शर्मा, सहनगर प्रमुख बीना रानी, रामकृष्ण विस्तार संचालक दिनेश नवाल तथा विस्तार प्रमुख कुशल उपाध्याय सहित विभिन्न दायित्ववान कार्यकर्ताओं सहित सभी सात योग वर्गों के साधकों ने सहभागिता की।"

विवेक  विवेक

Ajmer

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स्वामी विवेकानंद महानिर्वाण दिवस कार्यक्रम

04-Jul-2019 | 93 Present

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"‘अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन’ विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की स्थानीय शाखा द्वारा स्वामी विवेकानन्द के महानिर्वाण दिवस पर रामकृष्ण विस्तार एवं विवेकानन्द विस्तार में संचालित विभिन्न योग वर्गों में स्वामी विवेकानन्द के विचारों पर चर्चा एवं समष्टि में सकारात्मक भाव के निर्माण हेतु मंत्रोच्चारण के साथ मनाया। इस अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र राजस्थान प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ0 स्वतन्त्र शर्मा ने कृष्णगंज स्थित शिवाजी पार्क में संचालित योग वर्ग में चर्चा करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारत और पश्चिम के लिए अलग अलग संदेश दिया। जहाँ पश्चिमी देशों में जाकर भारत से आध्यात्मिक ज्ञान को सीखने का मंत्र दिया वहीं भारतीयों को धार्मिक रूढ़िवादिता एवं अंधविश्वासों को दूर करने के लिए विज्ञान और तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। स्वामी विवेकानन्द ने संपूर्ण विश्व के उत्थान का मार्ग अभ्युदय और निःश्रेयस को बताया जिसमें अध्यात्म प्रेरित विकास ही विश्व में सुख और शांति का आधार हो सकता है। संपूर्ण भारत के भ्रमण में उन्होंने भारत की गरीबी को निकट से देखा और युवाओं को गाँव-गाँव में ऐसे वैचारिक केन्द्र खोलने का आहवान किया जिनमें युवा अपने नैतिक मूल्यों एवं संस्कृति को सीखकर आधुनिक ज्ञान के साथ उसका समन्वय स्थापित कर सकें। प्रचार प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि महानिर्वाण दिवस पर विवेकानन्द केन्द्र के द्वारा निःशुल्क योग अभ्यास वर्गों में शहीद भगत सिंह उद्यान वैशाली नगर में डाॅ0 भरतसिंह गहलोत, भीष्म टेवानी एवं डाॅ0 अशोक मित्तल, चाणक्य स्मारक पंचशील नगर पर डाॅ0 अनिता खुराना एवं डाॅ0 सुरेश बबलानी, शिवाजी पार्क कृष्ण गंज में डाॅ0 महेश गुप्ता एवं सुभाष नवाल, छतरी योजना उद्यान में कुशल उपाध्याय एवं सुनील गर्ग, रेल उद्यान में रविन्द्र जैन एवं नाथूलाल जैन तथा गाँधी भवन उद्यान आदर्श नगर में अखिल शर्मा एवं बीना तोमर ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। कुल छह योग वर्गों में आयोजन हुए एवं उपस्थिति 93 रही "

स्वामी  

Rajasthan-Prant

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Karyapaddhati - लोक मन संस्कार करना

01-Apr-2019 to 31-Mar-2020

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To take the thought of Kendra to entire Society Karyapaddhati plays an important role. There are 31 Sanskar Vargas in Rajasthan Prant 843 students participate in these regularly. 10 Swadhyaya Vargas with 123 youth and 14 Yoga Vargas with 149 participants are regularly going on. 207 karyakartas participate in 16 Kendra Vargas.